Manorma srivastva गज़ल Ghazal मंज़िलों का है मुश्किल सफ़र (Manzilon ka hai mushkil safar)
सारी दुनिया में इक दीदवर , कहकशाँ में हो जैसे क़मर । मंज़िलों का है मुश्किल सफ़र , राह चलना है अब उम्र भर । दिल में ख़्वाबों का इक आसमाँ , उड़ता रहता है मन रात भर । चाहिए क्या तुझे ज़िन्दगी , सीख पाया न कोई हुनर । शायरों से सजी महफिलें , एक से एक हैं ताज़ वर । मान जा माफ़ कर दे ख़ता , रूठ मत मुझसे जाने ज़िगर । खूबसूरत डगर इश्क़ की , चलता इस राह पर हर बशर । मत वफ़ा आज़मा तू मेरी , छलनी छलनी है मेरा ज़िगर । ज़ीस्त यादों का इक कारवां , इक 'मनोरम' सदी हिज़्र भर । मनोरमा श्रीवास्तव 'मनोरम' 27**08**2022