Kavi S L Dhawan बड़ी ईर्षालु ये दुनिया लगे है
बड़ी ईर्षालु ये दुनिया लगे है किसी का सुख जिसे कांटा लगे है। पराया प्राण पर सस्ता लगे है। लहू अपना उसे मंहगा लगे है मिरा जीवन मगर सस्ता लगे है यहां के पुष्प पक्षी हैं मनोहर चमन वर्ना बहुत फीका लगे है जहां प्रतिरूप हों सब उर्वशी के मुझे वो स्वर्ग का नक्शा लगे है तिरा आलाप है मिसरी कि जादू कि कड़वा सत्य भी मीठा लगे है मिले मुझको अगर तू शीश देकर ये सौदा फिर भी कुछ सस्ता लगे है। ये जीवन झूठ है इक स्वप्न जैसा मगर फिर भी 'कमल' सच्चा लगे है