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गज़ल (द्वारा प्रोफेसर सुदेश नूर) Ghazal Professor Sudesh Noor

 गजल जीवन में हँसने और हँसाने की बात कीजिए कोई रूठ जाये गर मनाने की बात कीजिए साथी अगर कोई उदास नज़र आये आपको दिल उसका प्यार से बहलाने की बात कीजिए कोई भटक जाये चलते चलते अगर अपनी राह से समझा के उसे राह पे लाने की बात कीजिए अंधेरों ने अगर कभी भी घेर लिया दोस्त को जीवन में उसके दीप जलाने की बात कीजिए काँटे अगर दिख जाये आपको किसी की राह में काँटे हटाकर फूल बिछाने की बात कीजिए कोई शहीद हो गया है अगर वतन के लिए यादों में उसकी अश्क़ बहाने की बात कीजिए  मानव जन्म मिला है यह वृथा ना हो जाये कहीं अपने प्रभु से लौ लगाने की बात कीजिए साँसों के व्यापारी से ही अब “नूर”रखिए वास्ता साँसों में उसको आप बसाने की बात कीजिए सुदेश नूर

गज़ल( द्वारा प्रोफेसर सुदेश नूर)—Ghazal by professor Sudesh Noor

 गजल हर ख़ौफ़ को इस दिल से भगाने बात कीजिए जब तक है जीवन हँसने हँसाने की बात कीजिए बेवजह दिल पे ख़ौफ़ का ना कोई बोझ भी रहे इस दिल में अब खुदा को बसाने की बात कीजिए कोई भी लफ़्ज़ ऐसा ज़ुबाँ पे कभी भी आये ना दिल किसी का ना आप दुखाने की बात कीजिए यह जिंदगी है मुख़्तसर , बस प्यार से गुज़ारिए  कोई रूठ गर जाये तो मनाने की बात कीजिए हर छोटी छोटी बात पर नाराज़ होना ग़लत है रिश्ते अज़ीज़ हैं तो निभाने की बात कीजिए साथी अगर नादान है तो आप ही कुछ सोचिए उसे “नूर”मुहब्बत से समझाने की बात कीजिए सुदेश मोदगिल नूर