Kavi S L Dhwan ki Shayrन हो जोश तो फिर जवानी भी क्या है?i
न हो जोश तो फिर जवानी भी क्या है? बिना गंध के रात रानी भी क्या है? कशिश हुस्न में है अगर प्यार हो तो बिना प्यार के रूपरानी भी क्या है? अगर कुछ न हो रंग ही ज़िंदगी में, खिला फिर धनुष आस्मानी भी क्या है? हवा के बिना सांस क्या,ज़िंदगी क्या! नहीं प्यास बुझती तो पानी भी क्या है? नदी काम की है बहे जो हदों में, जो तट तोड़ दे वो रवानी भी क्या है? मिले एक दिन की कि आयुष्य युग भर, तिरे साथ बिन ज़िंदगानी भी क्या है? किसी कल्पना में जो बनती है अक्सर, न सच सी लगे तो कहानी भी क्या है? वही जग बनाता , वही है मिटाता, सिवा इसके रब की निशानी भी क्या है? जियो तो किसीके लिए ही जियो तुम, 'कमल' वर्ना जीने का मानी भी क्या है?