S L Dhawan Shayri बंद आंखों से तिरा जल्वा दिखे

 बंद आंखों से तिरा जल्वा दिखे,

खोलता हूं आंख तो दुनिया दिखे।

चाहता हूं मैं कि रख्खूं आंख बंद,

ताकि तेरा ही मुझे चेहरा दिखे।

रेत सहरा की है चमके धूप में,

प्यास में लेकिन मुझे दरिया दिखे।

हुस्न तेरा हूर से कुछ कम नहीं,

तू दिखे तो स्वर्ग का नक़्शा दिखे।

लोग कहते हैं, नहीं कुछ ख़ास तू

पर मुझे तू चांद का टुकड़ा दिखे।

एक क़तरा ही बहुत है प्यार का,

तू महब्बत का मुझे चश्मा दिखे।

खो गया हूं यूं महब्बत में तिरी,

ज्यों सम॔दर में नहीं क़तरा दिखे।

क्या करिश्मा है नहीं ये प्यार का,

ये जहां सारा मुझे अपना दिखे।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Dr. Sangeeta Sharma kundra सेवा परमो धर्म अर्थात सेवा ही परम धर्म है (sewa parmo dharma)sewa hi param dharam hai

Kavi SL Dhawan सुर न हो तो बांसुरी में कुछ नहीं

Rajesh Tiwari (रात में जन्में नन्दकिशोर)Raat main janme nand kishore