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S L Dawan Kamal Kavita नज़रिया Nazaria

 नज़र आता नहीं जिनको कहीं भगवान दुनिया में, वही हर दम उठाते हैं कोई तूफान दुनिया में। इकट्ठा वो किये जाएं सदा सामान दुनिया में अहम् लगती है जिनको  सिर्फ अपनी जान दुनिया में। यहां इन्साफ़ कैसा है,ज़रा देखो तमाशा ये, सयाने मार खाते हैं,सुखी नादान दुनिया में।

S.L.Dhawan Kamal. Kavita किताब ए दुनिया Kitaab e duniya

 दुनिया है जिंदगी की निरंतर खुली किताब।  पढ़ता है कोई-कोई समझता कोई जनाब।  आवागमन जहां में अज़ल से है चल रहा, मकसद मगर है क्या ? नहीं इसका कोई जवाब।

S.L.Dhawan 'Kamal' kavita अपना पराया (Apna Paraya)

 अपना पराया कौन है,अहसास की ये बात है; जो प्यार दे, अपना लगे  बर-अक्स दुश्मन ज़ात है। सूरत से वो हमज़ात है, हमज़ौक़ भी, हमदर्द भी; उसको कहूं क्यों दोस्त जिसका क़स्द भीतरघात है। ज़ौक - शौक़ कस्द - इरादा