S.L.Dhawan 'Kamal' kavita अपना पराया (Apna Paraya)

 अपना पराया कौन है,अहसास की ये बात है;

जो प्यार दे, अपना लगे 

बर-अक्स दुश्मन ज़ात है।

सूरत से वो हमज़ात है,

हमज़ौक़ भी, हमदर्द भी;

उसको कहूं क्यों दोस्त

जिसका क़स्द भीतरघात है।

ज़ौक - शौक़

कस्द - इरादा

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