संदेश

मई, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Ghazals by Sangeetasharmakundra

  ग़ज़ल कैसे उसको जुदा करे कोई (Kaise usko juda kare koi)   2122 1212 22 काफिया आ Qafia Aa रदीफ़ करे कोई Radeef kre koi दिल में जब घर करा करे कोई । कैसे उसको जुदा करे कोई। क्यों वह बैठे हैं ऐसे ही गुमसुम । जाकर इसका पता करे कोई । क्या वो रहते हैं चुप युंही हर दम । बात उनसे करा करे कोई । जब वो कहते नहीं है कुछ भी तो। कैसे उनको सुना करे कोई । घुट गया दम मेरा मोहब्बत में । अब तो मुझको रिहा करे कोई । उलझे बैठे पुरानी बातों में । काम कुछ तो नया करे कोई । जब समझ ही लिए सभी अपने । कैसे किस का बुरा करे कोई। Ghazal : गज़ल : रात भर जिनको याद करते हैं  2122 1212 22 Qafia : erte काफिया : अरते Radeef : Hain, रदीफ़ हैं माना हम आज तुम पे  मरते हैं । पर मोहब्बत से फिर भी डरते हैं । देखे हैं दिल जो टूटते मैंने , अब न टूटें ,दुआ ये करते हैं । याद कर के कभी तुझे रोते , और कभी हाय,आह भरते हैं । कल थे जो गमख्वार मेरे वो, अब कहां गम वो मेरे हरते हैं। याद में उनकी दिन ये ढलते हैं। रात भर जिनको याद करते हैं । Ghazal  मैं कभी तेरा हो नहीं पाया 2122 1212 22 Qafia : O, काफि़या  ...