Ghazals by Sangeetasharmakundra

 

ग़ज़ल कैसे उसको जुदा करे कोई (Kaise usko juda kare koi) 

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काफिया आ Qafia Aa


रदीफ़ करे कोई Radeef kre koi




दिल में जब घर करा करे कोई ।

कैसे उसको जुदा करे कोई।


क्यों वह बैठे हैं ऐसे ही गुमसुम ।

जाकर इसका पता करे कोई ।


क्या वो रहते हैं चुप युंही हर दम ।

बात उनसे करा करे कोई ।


जब वो कहते नहीं है कुछ भी तो।

कैसे उनको सुना करे कोई ।


घुट गया दम मेरा मोहब्बत में ।

अब तो मुझको रिहा करे कोई ।


उलझे बैठे पुरानी बातों में ।

काम कुछ तो नया करे कोई ।


जब समझ ही लिए सभी अपने ।

कैसे किस का बुरा करे कोई।


Ghazal : गज़ल : रात भर जिनको याद करते हैं

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Qafia : erte काफिया : अरते

Radeef : Hain, रदीफ़ हैं

माना हम आज तुम पे  मरते हैं ।

पर मोहब्बत से फिर भी डरते हैं ।


देखे हैं दिल जो टूटते मैंने ,

अब न टूटें ,दुआ ये करते हैं ।


याद कर के कभी तुझे रोते ,

और कभी हाय,आह भरते हैं ।


कल थे जो गमख्वार मेरे वो,

अब कहां गम वो मेरे हरते हैं।


याद में उनकी दिन ये ढलते हैं।

रात भर जिनको याद करते हैं ।


Ghazal  मैं कभी तेरा हो नहीं पाया

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Qafia : O, काफि़या  ओ

Radeef  nahin paya ,रदीफ़- नहीं पाया

चाहा जो मैंने, वो नहीं पाया।

मैं कभी तेरा, हो नहीं पाया ।


जब से देखा तुझे है मैंने, मैं, 

यार ,इक पल भी सो नहीं पाया ।


मन ही मन तो  बहुत है दिल रोया  ,

पर ये दामन भिगो नहीं पाया।


बस गया जब से चेहरा ,आँखों में,

फिर तो आँखों से रो नहीं पाया ।


तू मिली भी नहीं, लगा फिर भी ,

दाग दामन का.., धो नहीं पाया।


1735 Ghazal : गज़ल : हैं बना ली किसी ने दीवारें।

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काफि़या अर Qafia Err

रदीफ़ : है ये Radeef hai ye

सबका अपना ,चुना हुनर है ये।

उस हुनर का ,ही तो असर है ये ।


हैं बना ली किसी ने दीवारें।

बन गया है उसी पे घर है ये।


याद में जिसकी पोंछे हैं आँसू ।

उसके ही प्यार की चुनर है ये।


वो जो आया अभी इधर से था।

क्या पता अब गया किधर है ये।


ढ़ूँढ़ता है तू दर ब दर जिसको।

देख वो हमसफ़र उधर है ये।


कुछ नहीं डरने जैसा बाहर तो।

तेरे भीतर का ही तो डर है ये।

13.25 pm 11 Aug 2021


1744 Ghazal : गज़ल : आए हो चाँद बनके तुम मेरे

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काफि़या : आने ,Qafia :Aane

रदीफ़ : पर,Radeef:  par


हम सिसकते रहे हैं जाने पर। 

ज्यूँ ठिठकते थे तेरे आने पर ।


होश होते हैं गुम, जो तू आए ।

होते ज्यूँ जाम इक लगाने पर।


तेरी आँखों में हम हो जाते गुम ।

पानी होता है ज्यूँ , जमाने पर ।


दर्द सीने का हम दिखाएं क्या ।

ये तो दिखता नहीं दिखाने पर ।


आए हो चाँद बनके तुम मेरे ।

खो नहीं जाना ,ईद आने पर।


सिसकियां कम, न अब तो होनी हैं।

रख दिया सर ,जो उनके शाने पर ।


1745 Ghazal : गज़ल : आते जाते हैं जिंदगी, में गम

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काफि़या : आने ,Qafia :Aane

रदीफ़ : पर,Radeef:  par

खुश है हम आज उनके आने पर।

होगा क्या हाल उनके जाने पर।


है मुकद्दर तो मेरा ऊँचा जो।

बैठा है याद के खजाने पर ।


आते जाते हैं जिंदगी, में गम।

हम भी खुश हैं इसी को पाने पर ।


खोए थे जिसके प्यार में हम तो ।

याद आया उसे बताने पर ।


वार दी जिंदगी उसी पर ये।

थी नज़र जिसकी तो खजाने पर ।


1746 Ghazal : गज़ल : दाद मिलती है उनको आने पर

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काफि़या : आने ,Qafia :Aane

रदीफ़ : पर,Radeef:  par

दाद मिलती है उनको आने पर।

करते हैं वो कमाल गाने पर।


आने-जाने में जिंदगी बीती।

अब तो बैठा हूँ इक ठिकाने पर ।


कोई तो आए बनके अब साथी।

चल पढ़े साथ जो बुलाने पर।


है चला छोड़ सब यहीं पर वो।

जो लगी जिंदगी कमाने पर ।


आइना देख मुस्कुराती थी ।

अब है चुप,.आईना दिखाने पर ।


जिस शक्ल पर गरूर था उसको ।

अब है मजबूर वो छिपाने पर ।

1747 Ghazal : गजल : है मजा़ आता ,रूठ जाने पर

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काफि़या : आने ,Qafia :Aane

रदीफ़ : पर,Radeef:  par


मानते हैं कहाँ मनाने पर।

है मजा़ आता ,रूठ जाने पर।


जिंदगी तो है आनी जानी पर ।

क्यों तू हँसता है आने जाने पर।


सूखी आँखें बहा के आँसू ,अब।

रोना आता नहीं रुलाने पर।


बन गई है वो ठूँट के जैसी ।

होंठ खुलते नहीं हँसाने पर।


हो गई है दबंग दुनिया ये।

कोई डरता नहीं डराने पर ।


क्यों ढही प्यार की इमारत वो।

उमर जिसको लगी बनाने पर ।

1748 Ghazal : गज़ल : खुश हूँ मैं उमर ,यूँ बिताने पर

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काफि़या : आने ,Qafia :Aane

रदीफ़ : पर,Radeef:  par

खुश हूँ मैं उमर ,यूँ बिताने पर ।

हाथ रब का रहा है शाने पर।


छुप  हैं जाते झलक दिखा कर वो,(उनको)। 

क्या मजा़ आता है सताने पर ।


आए हैं शेर लौट भारत को ।

धूल दुश्मन को सब चटाने पर ।


आज तक वो न सीख पाए हैं ।

इश्क का पाठ भी, पढ़ाने पर ।


जल गया आशियाँ बहारों का ।

क्या मिला दोनों को लड़ाने पर ।


चल दिए वो उजाड़ कर जिसको।

था जमाना लगा सजाने पर।


दूसरों की तो बात लगती है ।

खुद नहीं सोचते सुनाने पर।

212 212 212 212

काफिया आ Qafia Aa

रदीफ  दीजिए Radeef Dijiye

प्यार है कि नहीं यह बता दीजिए।

दर्दे दिल को मेरे कुछ हवा दीजिए।


कैसे दिल में मिलेगी मुझ कुछ जगह।

रास्ता दिल का अपने दिखा दीजिए ।


प्यार से मुझको अपना बना लो ज़रा ।

चाहे दिल को मेरे फिर दुखा दीजिए।


दिल तेरे को समझना तो आसान नहीं ।

खुद ही कोई तरीका बता दीजिए ।सिखा दीजिए ।

घर तेरे दिल को ही है बनाना मुझे ।

कैसे दिल में रहें हम बता दीजिए ।

12.04pm 04 May 2021

(Part 2)212 212 212 212

काफिया आ Qafia Aa

रदीफ  दीजिए Radeef Dijiye

अपने दिल को भी कुछ तो सदा दीजिए।

 प्यार है कि नहीं यह बता दीजिए।


प्यार में दिल दुखाने में है इक मजा ।

और जख्मों को मेरे हवा दीजिए।


चाहता है मुझे या नहीं चाहता ।

बस मेरे दिल को इतना बता दीजिए।


दर्द दिल का मेरे बढ़ गया है ज़रा।

ठीक होने की कोई दवा दीजिए ।


आईना देखना अब सताये मुझे।

कोई तस्वीर उनकी दिखा दीजिए ।

,(Part 3)212 212 212 212

काफिया आ Qafia Aa

रदीफ  दीजिए Radeef Dijiye

अपना दिल मेरे दिल से मिला दीजिए ।

चाहे कोई मुझे फिर सजा दीजिए ।


इस जहां का तो दस्तूर कहता यही।

दिल को लेके न तुम फिर दगा दीजिए।


कौन सानी यहां है तेरे हुस्न का ।

थोड़ा नजरों को अपनी झुका दीजिए ।


गिर ही जाएंगे सब जो खड़े हैं यहां ।

गर ज़रा सा यहां पर लजा दीजिए ।


लोग पागल समझने लगे हैं मुझे ।

क्या है सच आप उनको बता दीजिए ।


चाहता है सकूं दिल मेरा दीद का ।

रुख से पर्दा ये अपना हटा दीजिए ।


1.00pm 4May 2022

प्यार में दिल कभी जब लगा लीजिए।

जिंदगी उसको अपनी बना लीजिए।


मिलके नजरों को बढ़ने दो नज़दीकियां।

प्यार के जाम का फिर  मजा लीजिए ।


अब सवारों मुझे या बिगाड़ो  मुझे।

जो भी तस्वीर चाहो बना लीजिए।


अब भटकना मुझे रास आता नहीं ।

अपने दिल में मुझे अब बिठा लीजिए ।


याद में शाम से रात होने लगी ।

अपने सपनों में मुझको बुला लीजिए।

212 212 212 212


मुझको नजरों में अपनी सजा़ लीजिए 

और फिर प्यार का तुम मजा़ लीजिए।


आंख मिलकर चुराना बुरी बात है ।

खुल के नजरों से नजरें मिला लीजिए ।


दिल तुम्हारा तुम्हीं को न दे दे दगा ।

दिल चुराने से अपना बचा लीजिए ।


कोई दामन पकड़ ले न चलते हुए ।

यह दुपट्टा सरकता उठा लीजिए ।


हर कोई चाहता है तुझे देखना ।

रूख से अपने  ये पर्दा गिरा  दीजिए ।


चाहता दिल उतरना तेरे दिल में है ।

अपनी नजरों से नजरें मिला लीजिए।

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