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Kavi S L Dhawan Ghazal

 किसका करें खयाल किसे दर गुज़र करें सब सूरतें हसीन हैं, दिल पर असर करें जिस हुस्न पर निसार दिल-ओ-जां से आप हैं उसको बनाया जिसने, उधर भी नज़र करें कुछ खेल में, कुछ उन्स में जीवन बिता दिया अब तो चलो ख़ुदा की तरफ़ भी सफ़र करें अब तक तो उम्र बीत गई नफ़्स-ओ-हिर्स में बाकी रहा जो वक़्त उसे ख़ूबतर करें रिश्ते सभी ग़रज़ के हैं जब जान ये गए, फिर क्यों फ़िदा किसी पे भी जान-ओ-जिगर करें जाना जहां से सबको है, हो आज या कि कल, फिर क्यों न बोझ कम रखें जब भी सफ़र करें। अब तक मिला फ़साद से कुछ भी नहीं तो फिर आपस के फ़र्क क्यों न 'कमल' मुख़्तसर करें          xxxxxx