S.L.Dhawan Kamal. Kavita किताब ए दुनिया Kitaab e duniya

 दुनिया है जिंदगी की निरंतर खुली किताब।

 पढ़ता है कोई-कोई समझता कोई जनाब।

 आवागमन जहां में अज़ल से है चल रहा, मकसद मगर है क्या ?

नहीं इसका कोई जवाब।

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