Kavi SL Dhawan Ghazal प्यार में वक़्त यों गुजरता है

 ग़ज़ल


प्यार में वक़्त यों गुजरता है

ज्यों परिंदा उड़ान भरता है

मौसमों की ख़बर नहीं रहती

प्रेम जब दिल पे राज करता है

यों जवानी गुज़र गई अपनी

वक़्त ज्यों नींद में गुज़रता है

लहर को बांधना तो है संभव

वक़्त लेकिन कहां ठहरता है

प्यार हर घाव की दवाई है

पीर मनकी तमाम हरता है

भूल जाते हैं हम उचित अनुचित

काम जब दिल पे वार करता है

यह उसीका 'कमल' रहे हरदम

जिस  पे दिल एक बार मरता है।

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