Kavi S L Dhawan शोख़ तितली जिधर गई होगी
शोख़ तितली जिधर गई होगी
उस तरफ हर नज़र गई होगी
वो जिधर से गुज़र गई होगी
ख़ुशबू ख़ुशबू बिखर गई होगी
उसने ओढ़ा जो लाज का आंचल
मुंह की रंगत निखर गई होगी
तीर तलवार जो न कर पाए
आंख वो काम कर गई होगी
रूप जब चांद का ढला होगा
लहर तट से उतर गई होगी
दिल मचलता नहीं अब उसके लिए
हुस्न की धार मर गई होगी
प्यार जिसको 'कमल' मिला होगा
उसकी किस्मत संवर गई होगी
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