Kavi S L Dhawan Ghazal आग दिल में अगर लगी होगी
आग दिल में अगर लगी होगी
कुछ तो बाहर लपट उठी होगी
जब नज़र से नज़र मिली होगी
प्यार की बांसुरी बजी होगी
लोग चर्चा न यों ही करते हैं
वज्ह कुछ तो ज़रूर ही होगी
बात जो आ न पाई होठों पर
आंख ने सैन से कही होगी
काम दिनभर, थकान कब उतरे
रात यों ही नहीं बनी होगी
देखकर दुख द्रवित न हो दिल तो
आंख में फिर कहां नमी होगी
दिल अकारण 'कमल' नहीं तड़पे
बात कंटक सदृश चुभी होगी
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