Rajesh Tiwari ((एक बार फिर आओ श्याम)Ek baar phir aao shyam

 ऊँ

एक बार फिर आओ श्याम


एक बार फिर आओ श्याम ।

वंशी मधुर बजाओ श्याम ।।

गीता ज्ञान सुनाओ श्याम ।

सरल ह्रदय से ले रहे नाम ।।


अब अन्याय बढ़ा है भारी ।

आ जाओ हे गिरिवरधारी ।।

गऊ माता है बहुत दुखारी ।

तुम भक्तन की विपदा टारी ।।

रटते नाम ये आठो याम ।

एक बार ...........,१


जमुना जी का जल प्रदूषित ।

अन्यायी शासक होय भूषित ।।

देख दावानल वन में दहकी ।

ए मदिरा मंचों पर भी महकी ।।

रिस्वत बिन होते नहीं काम ।

एक बार ............२


कर्म अकर्म को मानव भूला ।

पाकर कष्ट बहुत है कूला ।।

फिरता अहंकार में फूला ।

झूठ कपट से जलता चूला ।।

गीता ज्ञान सिखाओ श्याम ।

एक बार ..............३


 मित्र सुदामा भटक रहा है ।

जनता हक नृप गटक रहा है ।।

परदुख देख के मटक रहा है।

सम्बन्धों का घट चटक रहा है ।।

पाखण्डी बन गये तमाय ।

एक बार ...........४


राजेश तिवारी 'मक्खन'

झांसी उ प्र

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