Vijay D Goyal (कदम अपने बढ़ाता चल) Kadam apne badhata chal
देखकर प्रचंड तूफानों को,हिम्मत अपनी खो ना देना।
तू हारकर पथ के पथिक,नयन अपने भिगो ना देना।
तू राह के रोड़े हटाता चल।
तू कदम अपने बढाता चल।।
जग में कौन है ऐसा,जिसे सहज कुछ मिला है।
जिसने सहा तेज धूप को,वही पुष्प खिला है।
मुसीबतों को गले लगाता चल।
तू कदम अपने बढाता चल।
तेरा भी विजय केतु,इक दिन शिखर पे लहरायेगा।
अपने अडिग इरादों से,तू भी मंजिल पा ही जायेगा।
गीत खुशी के गुनगुनाता चल।
कदम अपने बढाता चल।
🖊️विजय डी गोयल
जैसलमेर,राजस्थान
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