प्राण संकट में पड़ें तो नाम लीजे राम का, राम से बढ़कर महातम राम के है नाम का। राम जिस पत्थर पे लिख्खा बस वही डूबा नहीं, तर गया भवसिंधु वह जिसको सहारा राम का। खेल में बचपन बिताया और यौवन भोग में, राम ही बस आसरा है ज़िंदगी की शाम का। जो संवारे ज़िंदगी अपनी न औरौं की कभी, आदमी होता नहीं है वह किसी भी काम का। दूसरों का दिल दुखाना सबसे बढ़कर पाप है, पीर हरना अन्य की है पुण्य चारों धाम का। बाद मरने के हमारे क्या किसी को लाभ है? जानवर हमसे है अच्छा, दाम जिसके चाम का। जो करेंगे सो भरेंगे, जानते हैं हम सभी, कर्म अच्छे कर लिए तो फ़िक्र क्यों परिणाम का? फूल फल जैसा हो वांछित, बीज वैसा बीजिये, बीजकर कीकर 'कमल' कैसे मिले फल आम का? xxxxxxxx रचनाकार: एस एल धवन 'कमल' पता:। 433 सैक्टर 11 पंचकूला 134112 सम्पर्क:। 09417838090 0172/2563659 प्रमाणित करता हूं कि यह मेरी स्वरचित अप्रकाशित रचना है।
You r a Best Righter and i INJOY Your Poems like Beautiful Song's
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