Rajesh Tiwari I Kavita महारानी लक्ष्मीबाई ye(Maharani Lakhami Bai)

 महारानी लक्ष्मीबाई 


अंग्रेजों के आगे आ गयीं  ,ध रें रूप दुर्गा काली । बाई साब झांसी वाली ।


गोरा करवे अति अन्याय ,रानी को बिलकुल न भाय ,सोचे अब का करें उपाय ,

सुमर भवानी महादेव को ,मुह पर छाई थी लाली ।................................१


सैनिक पहने कुर्ती लाल ,गोरन को वन गये वे काल ,लड लड के कर दये बेहाल ,

बर्छी ढाल कृपाण कटारी ,लट लटके कांधे काली  ।.................................२


करती कर्म भूमि से प्यार , कसके बांधी कमर कटार , हर हर महादेव उच्चार ,

जीवन सौपो मातृ भूमि को ,पी गयीं वो अमृत प्याली ।.........................३


धन्य धन्य नगरी झांसी, धन्य यहाँ के सब वासी ,गरिमा जाकी है खासी ,

गोरन की गोरी चमड़ी तब कोयले सी हो गई काली ।..............................४


सुन्दर मुन्दर झलकारी ,सखी सहेली अति प्यारी ,स्वामी भक्ति शक्ति भारी ,

सातऊ जाते हिलमिल रह रई , जैसे पूजा की थाली ।............................५


राजेश तिवारी मक्खन

झांसी उ प्र


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